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शहादा इस्लाम में प्रवेश

शहादा

इस्लाम स्वीकार करने के इच्छुक व्यक्ति के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है और वह शहादतैन (दो गवाहियों) का बोलना अर्थात्

ला इलाहा इल्लल्लाह ” (अल्लाह के सिवा कोई भी परमेश्वर नहीं है)

और

मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह ” (मुहम्मद अल्लाह के प्रेषित हैं)

का इक़रार करना है।

इस्लाम धर्म की सुन्दरता और उस की अच्छाईयों में से यह तथ्य है कि इस में एक व्यक्ति और उस के परमेश्वर के बीच संबंध में कोई मध्यस्थ नहीं है। तथा इस धर्म की सुन्दरता और अच्छाईयों में से यह भी है कि इस में प्रवेष करने के लिए किसी व्यक्ति के सामने किसी कार्रवाई या प्रक्रिया की ज़रूरत नहीं होती है और न ही कुछ विशिष्ट लोगों की सहमति की आवश्यकता होती है, बल्कि इस्लाम में प्रवेश करना बहुत आसान है और किसी भी इंसान के लिए ऐसा करना सम्भव है चाहे वह किसी जंगल (मरूस्थल) या बन्द कमरे में अकेला ही क्यों न हो। इस के लिए पूरी प्रक्रिया मात्र दो सुन्दर वाक्य का कहना है जो दोनों इस्लाम के सम्पूर्ण अर्थ को शामिल हैं, इंसान के अपने पालनहार की दासता और बन्दगी के इक़रार, उस के सामने अपने आप को समर्पित करने और इस बात को स्वीकारने पर आधारित हैं कि वही (अल्लाह) उस का पूज्य, उस का स्वामी, और उस के बारे में जो चाहे फैसला करने वाला है, और यह कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के बन्दे (उपासक, दास) और पैगंबर हैं जिन की उन चीज़ों में पैरवी करना अनिवार्य है जिस की उन के परमेश्वर ने उनकी तरफ प्रकाशना की है, और आप का आज्ञा पालन सर्वशक्तिमान अल्लाह के आज्ञापालन में दाखिल है।जिस व्यक्ति ने इन दोनों शहादतों (अर्थात "ला इलाहा इल्लल्लाह" की शहादत और "मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह" की शहादत) को उन पर यक़ीन और विश्वास रखते हुये अपनी ज़ुबान से अदा कर दिया तो वह मुसलमान और मुसलमानों के अफ्राद में से एक फर्द हो गया, उस के लिए वे सभी अधिकार हैं जो मुसलमानों के लिए हैं, और उस के ऊपर वे सभी कर्तव्य अनिवार्य हैं जो अन्य मुसलमानों पर हैं।

इस के तुरन्त बाद वह उन धार्मिक कर्तव्यों का पालन शुरू कर दे जिन्हें अल्लाह तआला ने उस के ऊपर अनिवार्य कर दिया है जैसे कि पाँच दैनिक नमाज़ें उन के ठीक समय पदर अदा करना, रमज़ान के महीने में रोज़े रखना और इन के अलावा अन्य कर्तव्यों का पालन करना। इस से, ऐ बुद्धिमान प्रश्नकर्ता! आप के लिए स्पष्ट हो जाता है कि आप तुरन्त मुसलमान हो सकती हैं, अत: आप उठें और स्नान करें, फिर यह वाक्य कहें : "अश्हदो अन् ला इलाहा इल्लल्लाह व अश्हदो अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह" (मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद उस के दास (उपासक) और सन्देष्टा हैं।)

इस धर्म में आपका स्वागत है, और जिस चीज़ की तरफ आप ध्यानमग्न हुए हैं उस पर आपको बधाई देते हैं। अल्लाह तआला आप को हर बुराई से बचाए।

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