भारतीय उपमहाद्वीप

गजवा-ए-हिन्द या गज़वा-ए-हिंद इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के कुछ व्याख्यान में की गई एक भविष्यवाणी है जो मुसलमानों और काफिरों के बीच भारत में एक युद्ध की पूर्वकथन करती है जिसके परिणामस्वरूप मुसलमानों की जीत होती है और एकेश्वरवाद तथा शरिया कानून लागु होगा। [1]

भविष्यद्ववाणी

हदीस संग्रह में भविष्यवक्ता ने कहा है:

थौबान (रज़ी अल्लाहु अन्हु) द्वारा वर्णित

"मेरी उम्मा के दो समूह हैं जिन्हें अल्लाह आग से मुक्त करेगा: वह समूह जो भारत पर हमला करता है और दूसरा जो ईसा इब्न मरियम के साथ होगा"।

- सुन्नन नासाई, जिहाद की पुस्तक, 3175 [2]

अबू हुरैरा (रज़ी अल्लाहु अन्हु) द्वारा वर्णित

"अल्लाह के दूत ने वादा किया था कि हम भारत पर आक्रमण करेंगे। अगर मैं यह देखने के लिए रहता हूं तो मैं खुद को और मेरी संपत्ति को निछावर करूंगा। अगर मैं मर गया तो मैं शहीदों में से एक बनूंगा और यदि मैं वापस आऊंगा तो मैं अबू हुरैरा अल-मुहरर (आग से मुक्त) हूँगा "।

- सुन्नन-नासाई, जिहाद की पुस्तक, 3173 और 3174 [3]

अबू हुरैरा (रज़ी अल्लाहु अन्हु) द्वारा वर्णित

"इस उम्मा में सैनिक सिंध और हिंद की ओर बढ़ेंगे" ।

- किताब अल-फितन (नाइम इब्न हमाद) [4]

अबू हुरैरा तथा सफवान बिन उमरो (रज़ी अल्लाहु अन्हुम) द्वारा वर्णित

"उम्मत का एक समूह भारत को पराजय देगा, अल्लाह उनके लिए भारत को खोल देगा जब तक कि वे वहां के राजाओं को जंजीरों के साथ बांध कर  नहीं लौटते- अल्लाह उन योद्धाओं को माफ कर देगा - जब वे वापस लौटेंगे (भारत से), उन्हें सीरिया में ईसा इब्न मरियम मिलेगा" ।

- किताब अल-फितन (नाइम इब्न हमाद) [5]

हज़रत काब (रज़ी अल्लाहु अन्हु) द्वारा वर्णित

"यरूशलेम (बैतुल मकदीस) का एक सुलतान योद्धाओं को हिंदुस्तान की तरफ आगे बढ़ेगा। योद्धा हिंद की भूमि को नष्ट कर देंगे और वहां के खजाने को जब्त कर लेंगे जिसे सुलतान यरूशलेम की सजावट के लिए उपयोग करेगा। वह सेनाएं भारतीय राजाओं को यरूशलेम के सुलतान के सामने लाएंगी। सुलतान के आदेश से उनके योद्धा पूर्व और पश्चिम के बीच के सभी क्षेत्रों को पराजित करेंगे और दज्जल की उपस्थिति तक हिंदुस्तान में रहेंगे" ।

- किताब अल-फितन (नाइम इब्न हमाद) [6]

ईमाम इब्न काथिर

ईमाम इब्न काथिर (रहमतुल्लाह अलैह), एक सीरियाई इतिहासकार ने अपनी किताब "अल-बिदाया वा-एन-निहाया।" में इस भविष्यवाणी के तहत 1024 में सोमनाथ मंदिर पर गजनवी के हमले को शामिल किया है। [7]

शाह नेमतुल्लाह वली

पंद्रहवीं शताब्दी के एक फारसी सूफी विद्वान और कवि शाह नेमतुल्लाह वली (रहमतुल्लाह अलैह) ने अपने क़ासिदा "पेश गोई" के कुछ श्लोक में इस भविष्यवाणी को ले कर कहा है कि

दुनिया के चारों कोनों के मुस्लिम योद्धा हिंद के खिलाफ गठबंधन बनाने के लिए हाथ मिलाएंगे और वह गंगा नदी तक विजय प्राप्त करेंगे

और

मुजाहिदीन के लिए युद्ध की लुटे हुवे माले ग़नीमत में सुंदर लड़कियां तथा प्यारी सौम्य महिलाएं शामिल होंगी। [8]

निर्वचन

कुछ विद्वानों का मानना ​​है कि जब मुसलमानों ने मुआविया इब्न अबी सूफयान (रज़ी अल्लाहु अन्हु) और इसके बाद महमूद इब्न सुबुक्तिगिन (महमूद ग़ज़नवी), मुइजुद्दीन मुहम्मद घोरी, तैमूर बिन तरघय बर्लास, अहमद शाह अब्दाली आदि के शासनकाल के दौरान भारत पर हमला किया था तब भविष्यवाणी पूरी हो चुकी है। विद्वानों की एक अल्पसंख्यक राय है कि पैग़म्बर मुहम्मद की नुबुव्वत से लेकर क़ियामत तक मुसलमानों और काफ़िरों के बीच भारत को लेकर किसी भी संघर्ष को इस हदीस में शामिल किया जा सकता है।अन्य लोग मानते हैं कि गजवा-ए-हिंद अभी तक पूरी तरह से नहीं हुई है लेकिन ऐसा तब होगा जब ईसा बिन मरियम (जीसस) और इमाम महदी (अलैहुम सलाम) विवरण की गई परंपराओं के अनुसार स्वर्ग से उतर कर दज्जाल से युद्ध करते हैं। [9] [10] [11]

सन्दर्भ

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